
आज से लगभग अढ़ाई शताब्दी पुर्ब मुगलों के दौर में बाबा श्री मूल चंद मेहता जी होशियारपुर के न्यायाधीश के पद पर नियुक्त थे | एक बार श्री बाबा मूल चंद जी कि अदालत में तत्कालीन मुग़ल शासकों से सम्बन्धी एक मुकदमा पेश हुआ जिसके सम्बन्ध में बाबा मूल चंद मेहता जी के पास उन्हे यह सन्देश भिजवाया कि यदि उन्होने शाही परिवार के सदस्य के पक्ष में फैसला नां दिया तो उनका सिर धड़ से अलग करके उसे शासकों की घर की डयोढ़ी के नीचे दबा दिया जाएगा और डयोढ़ी में से प्रत्येक व्यक्ति उसके ऊपर से गुजरेगा | बाबा मेहता जी पर इस धमकी का कोई असर नहीं हुआ और उन्होने कहा कि एक न्यायाधीश के नाते वह जो उचित समझेंगे वही फैसला सुनाएंगे चाहे वह शासक परिवार के पक्ष में जाता हो या अथवा विरुद्ध |
बाबा मूल चंद मेहता जी की अदालत में मुकदमा पेश किया गया तो तथ्यों को शासक परिवार के खिलाफ देख कर बाबा मेहता जी ने उसके खिलाफ फैसला सुना दिया और वहां से जब वह होशियारपुर के निकट गाँव हरयाना स्थित अपने घर लौट रहे थे तो गाँव से चार मील पीछे ही मुग़ल शासकों के कर्मचारियों ने उनकी बग्घी रोक कर उन का सिर धड़ से अलग कर दिया और अपने साथ ले गए | जाते जाते उन्होने बाबा जी की बग्घी के घोड़े की टांगें भी तोड़ दीं और बाबा जी के सिर को धमकी के अनुसार डयोढ़ी के नीचे दबा दिया गया |
बाबा जी शिव भक्त थे और एक बरगद के पेड़ के नीचे नियमित रूप से शिव अराधना किया करते थे | मुग़ल शासकों के आदमी उनका धड़ से अलग किया हुआ सिर भले ही अपने साथ ले गये थे लेकिन इसके बाबजूद उनका सिर वहिन धड़ चार मील दूरी तय करके उसी बरगद के पेड़ के नीचे पहुंच कर रुका और वही उन्होने अपने प्राण त्यागे | आज बाबा जी के श्रद्धलुओं ने तथा उनके परिजनों ने गाँव हरयाना मे स्थित बरगद के इसी पेड़ के नीचे बाबा मूल चंद जी की समाधि बना दी है जहाँ मेहता बिरादरी के लोग तथा अन्य श्रद्धलु लोग बाबा जी को श्रद्धांजलि भेट करने तथा अपनी मुरादें पूरी करवाने के लिये आतें है | प्रति वर्ष ज्येष्ठ महीने के प्रथम रविवार को बाबा मेहता जी की समाधि पर वार्षिक भंडारा लगाया जाता है |
Jai Baba Mulchand Mehta Ji
Dedicated to
Late Shri Hari Parkash Mehta ji